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हर हर शम्भू, हर हर शंकर

  साथ चलु तेरे साथ चलु भोले में पकड़ तेरा हाथ चलु कहीं खोना जाऊ में; इस माया के राहों में इस माया के राहों में.... जहाँ मिलते है अपने; कहने को मोह में फिर बांध देते दे के कुछ पल की ख़ुशी है सारा जीवन माँग लेते सारा जीवन माँग लेते.... में शोर करू तू राग बने में मौन रहुँ तू आवाज़ बने में जब कभी हारू तो भोले तू सहारा बन मेरा तू सहारा बन मेरा.... खामोशी के अंधेरे ये अंदर ही अंदर घेरे रे.. मैं टूट रहा हूँ बाहर से हिम्मत का सवेरा तू कर दे हिम्मत का सवेरा तू कर दे... साथ चलु तेरे साथ चलु भोले में पकड़ तेरा हाथ चलु है शिव शम्भू, है शिव शंकर रख मुझसे नाता सदियों भर तू साथ रहे संग हर जीवन मुझ में तू बस; कर मुझे पावन हर जीवन बस ये गाउँ में हर हर शम्भू; हर हर शंकर

इक खत, तुम्हें लिखता हूँ

  इक खत, तुम्हें लिखता हूँ वो गुज़रा कल लिखता हूँ वो रंगीन श्याम लिखता हूँ इक खत, तुम्हें लिखता हूँ वो मुलाकातें तमाम लिखता हूँ वो मिले तुमसे सुकून, आराम लिखता हूँ वो पहले जश्न का जाम लिखता हूँ इक खत, तुम्हें लिखता हूँ वो दिन लिखता हूँ, वो रात लिखता हूँ वो तुमसे हुई सारी बात लिखता हूँ वो तुमसे मिलने का एहसास लिखता हूँ इक खत, तुम्हें लिखता हूँ वो तेरे चिबुक का तिल लिखता हूँ वो पहेली मुलाकात का धड़कता दिल लिखता हूँ वो होटल का पहेला बिल लिखता हूँ इक खत, तुम्हें लिखता हूँ वो गर्मियों की तपती घाम लिखता हूँ वो बारिशों की हुई बरसात लिखता हूँ वो सर्दियों में सुलगती आग लिखता हूँ इक खत, तुम्हें लिखता हूँ वो बगीचे में मिलने का बहाना लिखता हूँ वो मेरे दिल में, तेरा ठिकाना लिखता हूँ वो तेरे मेरे प्यार का अफसाना लिखता हूँ इक खत, तुम्हें लिखता हूँ वो तेरे मुकरने का पल लिखता हूँ वो नहीं सूझता 'मुझे कोई हल' लिखता हूँ वो तेरा मुझसे किया छल लिखता हूँ इक खत, तुम्हें लिखता हूँ वो तेरी मोहब्बत का मर्ज लिखता हूँ वो तेरे जाने का दर्द लिखता हूँ वो अधूरे मोहब्बत का गम लिखता हूँ इक खत, तुम्हें लिखता हूँ

ढूंढ रहे कोई अपना सा

  शुरू हुआ कब खत्म हुआ, या था ये कोई सपना सा हम भी तन्हा खड़े राह पे, ढूंढ रहे कोई अपना सा अपना सा जो मिले राह पे आकर के मुझे थाम ले थाम ले, और लगे गले, धीरे से कानो में कहे कहे की संग में हूँ तेरे, अब खुद को तू आराम दे आराम दे इन बाहों में, इन ज़ुल्फ़ों की ठंडी छाओं मैं छाओं मैं जिसमे मिले सुकून, सुकून मिले हर लम्हा का लम्हा हो कुछ ऐसा सा, जिसमें तेरा एहसास रहे एहसास रहे वो पल पल का, जिसमें तू मेरे साथ रहे साथ रहे, मेरे पास रहे तुम से ही हर दिन मेरा खास रहे खास रहे और प्यार रहे फिर रहूँ ना में कभी तन्हा सा तन्हा सा में रहूँ जो कभी, लगे प्यार मुझे सपना सा जो शरू हुआ कब खत्म हुआ ।।