इक खत, तुम्हें लिखता हूँ
इक खत, तुम्हें लिखता हूँ
वो गुज़रा कल लिखता हूँवो रंगीन श्याम लिखता हूँ
इक खत, तुम्हें लिखता हूँ
वो मुलाकातें तमाम लिखता हूँ
वो मिले तुमसे सुकून, आराम लिखता हूँ
वो पहले जश्न का जाम लिखता हूँ
इक खत, तुम्हें लिखता हूँ
वो दिन लिखता हूँ, वो रात लिखता हूँ
वो तुमसे हुई सारी बात लिखता हूँ
वो तुमसे मिलने का एहसास लिखता हूँ
इक खत, तुम्हें लिखता हूँ
वो तेरे चिबुक का तिल लिखता हूँ
वो पहेली मुलाकात का धड़कता दिल लिखता हूँ
वो होटल का पहेला बिल लिखता हूँ
इक खत, तुम्हें लिखता हूँ
वो गर्मियों की तपती घाम लिखता हूँ
वो बारिशों की हुई बरसात लिखता हूँ
वो सर्दियों में सुलगती आग लिखता हूँ
इक खत, तुम्हें लिखता हूँ
वो बगीचे में मिलने का बहाना लिखता हूँ
वो मेरे दिल में, तेरा ठिकाना लिखता हूँ
वो तेरे मेरे प्यार का अफसाना लिखता हूँ
इक खत, तुम्हें लिखता हूँ
वो तेरे मुकरने का पल लिखता हूँ
वो नहीं सूझता 'मुझे कोई हल' लिखता हूँ
वो तेरा मुझसे किया छल लिखता हूँ
इक खत, तुम्हें लिखता हूँ
वो तेरी मोहब्बत का मर्ज लिखता हूँ
वो तेरे जाने का दर्द लिखता हूँ
वो अधूरे मोहब्बत का गम लिखता हूँ
इक खत, तुम्हें लिखता हूँ
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