ढूंढ रहे कोई अपना सा
शुरू हुआ कब खत्म हुआ, या था ये कोई सपना सा
हम भी तन्हा खड़े राह पे, ढूंढ रहे कोई अपना साअपना सा जो मिले राह पे आकर के मुझे थाम ले
थाम ले, और लगे गले, धीरे से कानो में कहे
कहे की संग में हूँ तेरे, अब खुद को तू आराम दे
आराम दे इन बाहों में, इन ज़ुल्फ़ों की ठंडी छाओं मैं
छाओं मैं जिसमे मिले सुकून, सुकून मिले हर लम्हा का
लम्हा हो कुछ ऐसा सा, जिसमें तेरा एहसास रहे
एहसास रहे वो पल पल का, जिसमें तू मेरे साथ रहे
साथ रहे, मेरे पास रहे तुम से ही हर दिन मेरा खास रहे
खास रहे और प्यार रहे फिर रहूँ ना में कभी तन्हा सा
तन्हा सा में रहूँ जो कभी, लगे प्यार मुझे सपना सा
जो शरू हुआ कब खत्म हुआ ।।
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